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शुद्ध: purdah sheer filet net amount of risk net annual | |
शुद्ध अंतःकरण: good conscience | |
अंतःकरण: conscience inner sense | |
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शुद्ध अंतःकरण से in English
[ shudha amtahkaran se ] sound:
शुद्ध अंतःकरण से sentence in Hindi
Examples
More: Next- वह बहुत खराब ढंग और शुद्ध अंतःकरण से पढ़ते थे और आलोचना को सकारात्मक भाव से ग्रहण करते थे.
- उन्होंने शपथ ली थी कि वे भारत की एकता और अखंडता को अक्षुण रखेंगे और अपने कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक और शुद्ध अंतःकरण से निर्वहन करेंगे.
- हे अनन्त! आपके सगुण-िनगर्ुण दोनों स्वरूपों का ज्ञान किठन होने पर भी िनगर्ुण स्वरूप की मिहमा इिन्दर्यों का पर्त्याहार करके शुद्ध अंतःकरण से जानी जा सकती है।
- उन्होंने देश के सामने शपथ ली थी कि वह अपने मंत्री पद के दायित्वों का शुद्ध अंतःकरण से निर्वहन करेंगे मगर क्या उन्होंने खेल मंत्री पद की ज़िम्मेदारी पूरी तरह निभाई.
- उन्होंने देश के सामने शपथ ली थी कि वह अपने मंत्री पद के दायित्वों का शुद्ध अंतःकरण से निर्वहन करेंगे मगर क्या उन्होंने खेल मंत्री पद की ज़िम्मेदारी पूरी तरह निभा ई.
- इसकी वजह से उपजी ग्लानि और क्षोभ को धोने का एकमात्र उपाय यही बचता है कि शुद्ध अंतःकरण से हम अपनी भूलचूक को स्वीकार कर लें और सबके प्रति विनम्रता का भाव जगाएँ।
- जब प्रश्नकत्र्ता, निश्छल हो कर एवं शुद्ध अंतःकरण से, टैरो कार्ड के बिखरे समूह में से प्रथम पत्ते को निकालता है, तो उस समय-विशेष में जातक जिस मानसिक उतार-चढ़ाव, अथवा उद्वेग-आवेग से गुजर रहा होता है, उसे प्रकट करता है ;
- मैं भारत की प्रभुता और अखंडता अक्षुण्ण रखूँगा, मैं संघ के मंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक और शुद्ध अंतःकरण से निर्वहन करूँगा तथा मैं भय या पक्षपात, अनुराग या द्वेष के बिना, सभी प्रकार के लोगों के प्रति संविधान और विधि के अनुसार न्याय करूँगा।'
- (मैं भारत की प्रभुता और अखंडता अक्षुण्ण रखूँगा,) मैं-राज्य के मंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक और शुद्ध अंतःकरण से निर्वहन करूँगा तथा मैं भय या पक्षपात, अनुराग या द्वेष के बिना, सभी प्रकार के लोगों के प्रति संविधान और विधि के अनुसार न्याय करूँगा।'
- बम्बई के स्नेही ही आवाज टेलीफोन पर कलकत्ता में सुनाई देती है तो फिर भक्ति भाव से, शुद्ध अंतःकरण से और अनन्य श्रद्धा से किया हुआ श्राद्ध मंत्रशक्ति के बल पर पितरों को तृप्ति देता है यह बात आधुनिक चार्वाकों के दिमाग में क्यों नही ं घुसती है, यह एक प्रश्न है।